महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना

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प्रदेश में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना तीन चरणों में प्रारम्भ की गई। प्रथम चरण (2006-07) में जनपद टिहरी, चमोली एवं चम्पावत, द्वितीय चरण (2007-08) में जनपद हरिद्वार एवं ऊधमसिंह नगर तथा तृतीय चरण (2008-09) से प्रदेश के समस्त जनपदों में योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है।

उद्देश्य

  • ग्रामीण परिवारों को वित्तीय वर्ष में 100 दिवस के श्रम रोजगार की कानूनी गारंटी प्रदान करते हुए आजीविका सुरक्षा में वृद्धि।
  • जल संरक्षण, सूखा निवारण, सिंचन सुविधा, भूमि विकास, बाढ़ नियन्त्रण व जल निकास एवं सर्वमौसम सड़क द्वारा ग्रामीण संयोजकता सम्बन्धी कार्यों के निष्पादन द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में अवस्थापना सुविधाओं का विकास।

पात्रता

  • पंजीकृत ग्रामीण परिवारों के समस्त वयस्क जाॅब कार्ड धारक सदस्य जो अकुशल श्रमिक के रूप में कार्य करने के इच्छुक हों।

क्रियान्वयन प्रक्रिया

  • जनपद, विकासखण्ड तथा ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यक्रमों का व्यापक प्रचार-प्रसार।
  • ग्राम पंचायत स्तर पर श्रम रोजगार चाहने वाले परिवारों का पंजीकरण।
  • श्रम रोजगार के इच्छुक ग्रामीण परिवारों को निःशुल्क फोटोयुक्त परिचय पत्र/जाॅब कार्ड की सुविधा।
  • पंजीकृत मजदूरों द्वारा कार्य हेतु ग्राम पंचायत स्तर पर आवेदन।
  • योजनान्तर्गत ठेकेदारी प्रथा तथा मशीनों का उपयोग प्रतिबन्धित।
  • पंजीकृत आवेदनकर्ता की मांग पर श्रम रोजगार की उपलब्धता 15 दिवस के भीतर सुनिश्चित।
  • कम से कम लगातार 14 दिन के कार्य की मांग की अनिवार्यता।
  • 50 प्रतिशत कार्य ग्राम पंचायतों के माध्यम से।
  • परियोजनाओं का चयन एवं अनुमोदन ग्राम सभा, क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत द्वारा।
  • परियोजना निर्माण एवं क्रियान्वयन में रेखीय विभागों की सक्रिय भूमिका।

अधिनियम के अन्तर्गत वरीयतानुसार अनुमन्य कार्य

  • जल संरक्षण और जल शस्य संचय, जिसके अन्तर्गत कन्टूर खाइयां, कन्टूर बंध, गोलाश्म चेक, गबियन संरचनाएं, भूमिगत नहरें, मिट्टी के बांध, स्टाॅप बांध और झरनों का विकास भी हैं;
  • सूखारोधी, जिसके अन्तर्गत वनरोपण और वृक्षारोपण भी है;
  • सिंचाई नहरें, जिसके अन्तर्गत सूक्ष्म और लघु सिंचाई संकर्म भी हैं;
  • पैरा 1ग में विनिर्दिष्ट गृहस्थियों के स्वामित्वाधीन भूमि पर सिंचाई सुविधा, फार्म पर खोदा गया पोखर, बागवानी, वृक्षारोपण, मेढ़बंधन और भूमि विकास का उपबंध;
  • पारम्परिक जल निकायों का नवीकरण, जिसके अन्तर्गत तालाबों का शुद्धिकरण भी है;
  • भूमि विकास;
  • जलरुद्ध क्षेत्रों में जल निकास सहित बाढ़ नियन्त्रण और संरक्षण संकर्मख् जिसके अन्तर्गत बाढ़ नियन्त्रण नालियों को गहरा करना और उनकी मरम्मत करना, चैर नवीकरण, तटीय संरक्षण के लिए विप्लब जल नालियों का संनिर्माण;
  • सभी मौसमों में पहुंच को उपलब्ध करने के लिए ग्रामीण संयोजकता, जिसके अन्तर्गत गांव के भीतर, जहां कहीं आवश्यक हो, पुलिया और सड़कें भी हैं;
  • ब्लाॅक स्तर पर ज्ञान संसाधन केन्द्र के रूप में और ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम पंचायत भवन के रूप में भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केन्द्र का निर्माण;
  • एनएडीईपी कंपोस्टिंग, वर्मी कंपोस्टिंग, लिक्विड बायो-मेन्योर जैसे कृषि संबंधी संकर्म;
  • कुक्कुट आश्रय स्थल, बकरी आश्रय स्थल, पक्का फर्श, यूरिन टैंक का निर्माण और अजोला जैसा पशु भोजन संपूरक जैसे पशुधन संबंधी संकर्म;
  • सार्वजनिक भूमि पर मौसमी जल निकायों में मत्स्य पालन जैसे मत्स्य संबंधी संकर्म;
  • तटीय क्षेत्रों में मछली शुष्कन यार्ड, बेल्ट वेजिटेशन जैसे संकर्म;
  • सोक पिट्स, रिचार्ज पिट्स जैसे ग्रामीण पेयजल संबंधी संकर्म;
  • व्यक्तिगत घरेलू पखाने, विद्यालय शौचालय इकाइयां, आंगनबाड़ी शौचालय, ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन जैसे ग्रामीण स्वच्छता संबंधी संकर्म;
  • ऐसा कोई अन्य कार्य, जिसे केंद्रीय सरकार द्वारा, राज्य सरकार के परामर्श से, अधिसूचित किया जाय।

मजदूरी भुगतान प्रक्रिया

  • भारत सरकार द्वारा अकुशल श्रमिकों हेतु न्यूनतम मजदूरी 1 अप्रैल 2013 से रुपये 142/- निर्धारित।
  • महिला तथा पुरुष को एक समान मजदूरी देने की व्यवस्था।
  • 15 दिन के भीतर मजदूरी भुगतान की व्यवस्था।
  • कार्यों के लिए श्रमांश न्यूनतम 60 प्रतिशत तथा सामग्री अंश अधिकतम 40 प्रतिशत निर्धारित जिसमें कुशल एवं अर्द्धकुशल श्रमिकों की मजदूरी भी सम्मिलित है।
  • मजदूरी भुगतान बैंक/पोस्ट आॅफिस खातों के माध्यम से ही देय।

बेरोजगारी भत्ता

  • पंजीकृत मजदूरों को निर्धारित अवधि 15 दिन के भीतर कार्य आवंटन न होने की दशा में बेरोजगारी भत्ता देय। प्रथम 30 दिवसों हेतु मजदूरी की एक चैथाई एवं शेष अवधि के लिए मजदूरी की आधी दर से बेरोजगारी भत्ता देय।
  • खण्ड विकास अधिकारी/कार्यक्रम अधिकारी बेरोजगारी भत्ता भुगतान हेतु उत्तरदायी।

वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था

केन्द्र सरकार द्वारा

  • अकुशल मजदूरों के श्रमांश का शत-प्रतिशत।
  • कुशल एवं अर्द्धकुशल श्रमांश एवं सामग्री अंश का 75 प्रतिशत

राज्य सरकार द्वारा

  • कुशल एवं अर्द्धकुशल श्रमांश एवं सामग्री अंश का 25 प्रतिशत
  • बेरोजगारी भत्ता शत-प्रतिशत।

आवंटन प्रक्रिया

  • वित्तीय वर्ष हेतु निर्धारित लेबर बजट के केन्द्रांश एवं राज्यांश की 50 प्रतिशत धनराशि वित्तीय वर्ष के प्रथम पक्ष में सीधे जनपदों को आवंटित।
  • आवंटित धनराशि के 60 प्रतिशत उपयोग उपरान्त शेष धनराशि के प्रस्ताव भारत सरकार को ससमय उपलब्ध कराने उपरान्त आवंटन।
  • जनपद की कार्ययोजना एवं लेबर बजट के अनुसार जनपद स्तर से कार्यदायी संस्थाओं की स्वीकृत परियोजनाओं की धनराशि अग्रिम रूप से अवमुक्त किये जाने की व्यवस्था।

अनुश्रवण एवं मूल्यांकन

  • जनपद स्तर पर जिलाधिकारी/जिला कार्यक्रम समन्वयक द्वारा कार्यक्रम का निरन्तर अनुश्रवण।
  • विकासखण्ड स्तर पर खण्ड विकास अधिकारी द्वारा कार्यक्रम की निरन्तर समीक्षा एवं अनुश्रवण।
  • विकासखण्ड के अन्तर्गत कार्यदायी संस्थाओं से नियमित प्रगति सूचनाएं प्राप्त कर उच्च स्तर पर मासिक सूचनाओं का ससमय प्रेषण।
  • विकासखण्ड स्तर से आॅनलाइन/आॅफलाइन रिपोर्टिंग की व्यवस्था।
  • जनपद स्तर से भारत सरकार को सीधे आॅनलाइन रिपोर्टिंग।
  • राज्य, जनपद तथा विकासखण्ड स्तर से क्रमशः 2 प्रतिशत, 10 प्रतिशत तथा 100 प्रतिशत परियोजनाओं के सत्यापन की व्यवस्था।
  • राज्य/जिला स्तरीय अनुश्रवण एवं सतर्कता समितियों द्वारा निगरानी।
  • पारदर्शिता
  • संपादित कार्यों का ग्राम पंचायत स्तर पर पंचायत भवनों में प्रकाशन एवं अभिलेखीकरण।
  • ग्राम सभा स्तर पर सामाजिक सम्प्रेक्षण एवं सूचना का अधिकार अधिनियम का पूर्ण पालन।
  • प्रत्येक जनपद एवं राज्य स्तर पर टोल फ्री हैल्प लाइन की व्यवस्था।
  • जनपदवार वार्षिक रिपोर्ट का प्रकाशन।
  • विभागीय वेबसाइट पर योजना सम्बन्धी जानकारियों की उपलब्धता।
  • राज्य, जिला एवं विकासखण्ड स्तर पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण हेतु शिकायत पंजिका का रखरखाव।

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