स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना परिवर्तित नाम (आजीविका) (केन्द्र पोषित योजना)

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गरीबी रेखा के नीचे के परिवारों (स्व-रोजगारियों) को बैंक ऋण तथा सरकारी अनुदान के माध्यम से आय सृजक परिसम्पतियां मुहैया कराकर प्रत्येक बी.पी.एल. परिवार के सदस्य को स्वयं सहायता समूह का सदस्य बनाकर गरीबी रेखा से ऊपर उठाना है। योजनान्तर्गत केन्द्रांश व राज्यांश का अनुपात 75:25 है.

विशिष्टताऐं

  • स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना का लक्ष्य ग्रामीण निर्धनों की क्षमता का उपयोग कर ग्रामीण क्षेत्रों में बडी संख्या में छोटे-छोटे उद्यम लगाकर बी.पी.एल. परिवारों को गरीबी की रेखा से ऊपर उठाना है.

  •  स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना एक ऋण-सह-अनुदान कार्यक्रम है.

  • योजनान्तर्गत ग्रामीण गरीबों में से बहुत कमजोर परिवारों के समूहों पर ध्यान केन्द्रित किया जाना तथा स्वरोजगारियों में से 50 प्रतिशत अनु.जाति/जनजाति के 40 प्रतिशत महिलायें तथा 3 प्रतिशत विकलांगों एवं वर्ष 2002 के बी.पी.एल. सर्वेक्षण के आधार पर प्रत्येक वर्ष 15 प्रतिशत अल्पसंख्यक स्वरोजगारियों को लाभान्वित किया जाना. 

स्व-सहायता समूह गठन का उददेश्य/मानदंड

  •  स्थानीय संसाधनों/क्षमताओं का अधिकतम उपयोग करने के लिये जागरूक बनाना.

  • ग्रामीण महिलाओं एवं निर्धनों को आत्म निर्भर बनाना

  •  समान कार्य एवं रूचि के लोगों को एक साथ संगठित कर आय वर्धक कार्यक्रम चलाना

  •  ग्राम वासियों एवं बैंको के बीच विश्वसनीयता एवं आत्मविश्वास कायम करना

  • एक स्व-सहायता समूह में 10 से 20 लोगों को शामिल किया जाना. लघु सिंचाई के मामले में तथा विकलांग व्यक्तियों के मामले में यह संख्या न्यूनतम पांच हो सकती है.

  • उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों हेतु तोक व मजरे के बीच काफी अधिक दूरी होने के कारण ऐसे तोकों /मजरों में 5 से 10 स्वरोजगारियों का समूह गठित करने की सुविधा

  •  समूह के सभी सदस्य गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों की बी.पी.एल. सूची के होने अनिवार्य. समूह स्वयं को चलाने के लिये आचार संहिता (समूह प्रबन्ध मानदंड) बनायेगा. 

  • सदस्यों को नियमित बचतों के माध्यम से अपनी प्रारम्भिक पूंजी बनानी आवश्यक. सदस्यों को बचत की मात्रा का निर्णय स्वयं करना होगा, न्यूनतम मासिक बचत रू. 30.00 होना अनिवार्य.

  •  समूह की प्रारंभिक पंूजी सदस्यों को आपसी ऋण देने में प्रयुक्त की जायेगी. 

  • समूह द्वारा एक बैंक बचत खाता स्थानीय बैंको में खोले जायेंगे. समूह कार्यवृत्त पुस्तिका, उपस्थिति  रजिस्टर, ऋण खाता, सामान्य खाता, कैश बुक, बैंक पासबुक तथा वैयक्तिक पासबुक जैंसे सामान्य मूल रिकार्डों को रखेगा.

  • प्रत्येक विकास खण्ड में बनाये गये समूहों का 50 प्रतिशत समूह केवल महिलाओं के लिये होना अनिवार्य.


स्व-सहायता समूहों का श्रेणीकरण/क्षमता विकास

  • बी0पी0एल0 सर्वेक्षण के अन्तर्गत चिन्ह्ति परिवारों को समूहों के रूप में गठित करना. समूह द्वारा प्रतिमाह नियमित अन्तराल पर बैठकें कर बैठकों में समूहों द्वारा प्रतिमाह निर्धारित बचत की धनराशि जमा करना, समूहों द्वारा की गई बचत से पारस्परिक लेन-देन कर छः माह के बाद निर्धारित मानकों के अनुसार प्रथम ग्रेडिंग (श्रेणीकरण) किया जाना. 

  • प्रथम ग्रेडिंग में सफल होने पर समूह को रिवाल्विंग फण्ड के रूप में अनुदान जो समूहों की निधि के बराबर होगा तथा यह न्यूनतम रू. 5000.00 एवं अधिकतम रू. 10000.00 अनुदान देय होगा और बैंक ऋण से जुडा होगा. 

  • बैंक द्वारा समूह की आमेलन क्षमता तथा ऋण विश्वसनीयता के आधार पर नकद ऋण सुविधा के तौर पर समूह निधि के गुणक में जो कि चार गुना तक हो सकती है ऋण देय है. 

  • समूह द्वारा क्रियाकलाप का चयन किया जायेगा तथा चयनित क्रियाकलाप के संचालन हेतु कौशल वृद्धि प्रशिक्षण दिया जाना अनिवार्य है. 

  • अगले छः माह बाद निर्धारित मानकों के अनुसार समूहों की द्वितीय ग्रेडिंग (श्रेणीकरण) की जायेगी तथा द्वितीय ग्रेडिंग पार करने के पश्चात समूह द्वारा चयनित क्रियाकलाप हेतु बैंकों द्वारा वित्त पोषण किया जायेगा.

  • गठन की अवस्था छः माह की होगी. छः माह के पश्चात प्रत्येक स्व-सहायता समूह का परीक्षण(आंकलन) किया जायेगा

  • प्रारम्भ से प्रथम छः माहों में स्व-सहायता समूह का उददेश्य एक व्यवहार्य समूह के रूप में विकसित होना. तदनुसार छः माह के अंत पर समूहों के विकास की प्रथम अवस्था में उददेश्यों के प्रसंग पर श्रेणीकरण किया जाना चाहिये.


समूहों को वित्त पोषण/आर्थिक क्रियाकलाप का प्रारम्भ

  • योजना के अन्तर्गत अनुदान चयनित क्रियाकलाप का 30 प्रतिशत तथा समान दर पर देय होगी बशर्ते यह 7500 रू0 से ज्यादा न हो तथापि अनुसूचित जातियों/अनु जनजातियों तथा विकलांगों के सन्दर्भ में यह क्रमशः 50प्रतिशत तथा अधिकतम सीमा 10000 रू0 से ज्यादा न होगी। 

  • स्व-रोजगारी समूह (स्व-सहायता समूहों) के लिए वित्त पोषित अनुदान क्रियाकलाप का 50 प्रतिशत के बराबर या प्रति सदस्य रू. 10000 बशर्ते कि यह सीमा 1.25 लाख रू0 प्रति समूह से ज्यादा न हो । लघु सिचांई परियोजनाओं के लिए अनुदान की कोई आर्थिक सीमा नही होगी। 

  • अनुमन्य अनुदान का समायोजन Back ended subsidy के रूप में होगी। 

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